डीएम कानपुर की पहल,फरियादियों को बताते हैं पान मसाला और गुटखा के नुक्सान

कानपुर में पान मसाला गुटखा खाने के शौकीन लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है। यहां तक की कानपुर अपनी इस छवि के लिए बदनाम भी है। शहर की इस छवि में बदलाव के लिए जिलाधिकारी कानपुर ने पहल शुरु की है। उन्होंने लोगों को पान मसाला गुटखा खाने के नुक्सानों के प्रति अपने ही अंदाज में जागरुक करना शुरू कर दिया है। कोई फरियादी जब उनके जनता दरबार में पान मसाला खा कर पहुंचता है तो वह उसे इससे होने वाले नुक्सान के बारे में बताते हैं। साथ ही साथ फरियादी से शपथ भी लेते हैं कि वह अपने व अपने परिवार को बड़े नुक्सान से बचाने के लिए पान मसाला गुटखा खाना छोड देगा।
पिछले दिनों डीएम के जनता दरबार में एक फरियादी अपनी पत्नी के साथ फरियाद लेकर पहुंचा। डीएम ने देखा की पति गुटखा खाने की वजह से बोल नहीं पा रहा है। ऐसे में डीएम ने उससे कहा कि वह अपनी गुटखा खाने की आदत को छोड़ दे तो वह उसका काम कर देंगे। जिस पर उस शख्स ने बकायदा कागज पर लिख कर दे दिया कि वह आज से गुटखा नहीं खाएगा। इसी तरह डीएम लोगों को जनता दरबार के दौरान ही पान मसाला गुटखा खाने के नुक्सान बता कर इसे छोड़ने की अपील करते हैं। ऐसा ही एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें कुछ लोग डीएम से किसी समस्या के निस्तारण के बारे में मांग कर रहे हैं। इसी दौरान डीएम की नजर एक शख्स पर पड़ती है वह गुटखा खा रहा था। जिस पर डीएम ने कहा कि वह उनकी समस्या का निस्तारण कर देंगे लेकिन गुटखा खाना छोड़ दो। उन्होंने कहा कि आप छोड़ोगे तो आपको देख कर और लोग भी ऐसा करने को प्रेरित होंगे।
डीएम कानपुर जितेन्द्र प्रताप सिंह का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में तंबाकू का सेवन प्रतिबंधित है। ऐसा करने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी है। जनता दर्शन के दौरान कई बार लोग पाना मसाला खा कर पहुंच रहे हैं। जिसे देखते हुए उन्होंने लोगों को इसके लिए टोकना शुरू कर दिया है। उन्होने कहा कि पान मसाला खाने वालों को वह बताते हैं कि अगर उन्हें कैंसर जैसा रोग हो गया तो परिवार को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। लोगों को जागरुकर करने का काम किया जा रहा है, उन्हें टोका जा रहा है समझाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तमाम सरकारी कार्यालयों के प्रमुखों को भी कहा गया कि नो टोबैको के नियमों को लागू किया जाए। इससे पहले लोगों को जागरुक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गुटखा खाने से शारीरिक,समाजिक और आर्थिक समस्या पैदा होती है। वह अभिभावक की तरह लोगों को इस बुरी लत को छोड़ने के लिए जागरुक कर रहे हैं।